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अब एक ही अधिकारी होगा नगर निगम और विकास प्राधिकरण का

शहरों के सुनियोजित और समन्वित विकास के मद्देनजर नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों का दायित्व एक ही अफसर को सौंपने की तैयारी है। नगर आयुक्त व प्राधिकरण उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी एक ही को देने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए हैं। केंद्र सरकार में पहले से ही आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रलय दोनों काम देख रहा है। नीति आयोग ने भी विभागों के पुनर्गठन के बारे में राज्य सरकार को सुझाव दे रखा है। 1दरअसल, नगरों की साफ-सफाई, अवैध निर्माण, अतिक्रमण पर अंकुश व शहरों के सुनियोजित व समन्वित विकास के लिए नगर निगम व विकास प्राधिकरण हैं। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी पर दोनों ही विभाग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने में देर नहीं करते। ऐसे ही मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताते हुए सोमवार को एक बैठक में निर्देश दिया कि नगर निगमों में तैनात नगर आयुक्तों व विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति में निहित किया जाए। मुख्यमंत्री का मानना है कि ऐसा होने पर निर्णय लेने में आसानी होगी और सफाई व विकास संबंधी सभी कार्य सुचारु रूप से किए जा सकेंगे। बैठक में मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पाण्डेय, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि तकरीबन तीन दशक पहले नगर निगमों व विकास प्राधिकरणों के लिए शासन स्तर पर अलग-अलग विभाग बनाया गया था। चूंकि तब नगर निगमों का निर्वाचित सदन नहीं होता था इसलिए एक वरिष्ठ आइएएस ही प्रशासक की भूमिका में विकास प्राधिकरण व नगर निगम की कमान संभालता था।राज्य ब्यूरो, लखनऊ : शहरों के सुनियोजित और समन्वित विकास के मद्देनजर नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों का दायित्व एक ही अफसर को सौंपने की तैयारी है। नगर आयुक्त व प्राधिकरण उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी एक ही को देने के निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए हैं। केंद्र सरकार में पहले से ही आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रलय दोनों काम देख रहा है। नीति आयोग ने भी विभागों के पुनर्गठन के बारे में राज्य सरकार को सुझाव दे रखा है। 1दरअसल, नगरों की साफ-सफाई, अवैध निर्माण, अतिक्रमण पर अंकुश व शहरों के सुनियोजित व समन्वित विकास के लिए नगर निगम व विकास प्राधिकरण हैं। इसमें किसी तरह की गड़बड़ी पर दोनों ही विभाग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने में देर नहीं करते। ऐसे ही मामले सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताते हुए सोमवार को एक बैठक में निर्देश दिया कि नगर निगमों में तैनात नगर आयुक्तों व विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति में निहित किया जाए। मुख्यमंत्री का मानना है कि ऐसा होने पर निर्णय लेने में आसानी होगी और सफाई व विकास संबंधी सभी कार्य सुचारु रूप से किए जा सकेंगे। बैठक में मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पाण्डेय, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। 1उल्लेखनीय है कि तकरीबन तीन दशक पहले नगर निगमों व विकास प्राधिकरणों के लिए शासन स्तर पर अलग-अलग विभाग बनाया गया था। चूंकि तब नगर निगमों का निर्वाचित सदन नहीं होता था इसलिए एक वरिष्ठ आइएएस ही प्रशासक की भूमिका में विकास प्राधिकरण व नगर निगम की कमान संभालता था।

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