कल्याण जी संगीत दो अंतिम मुंबई

मुंबई | कल्याणजी-आनंद जी ने फिल्म उपकार में इंदीवर के रचित गीत कस्मेवादे प्यार वफा के जैसा दिल को छू लेने वाला संगीत देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके अलावा मनोज कुमार की ही फिल्म पूरब और पश्चिम के लिये भी कल्याण जी-आनंद जी ने दुल्हन चली वो पहन चली तीन रंग की चोली और कोई जब तुम्हारा हृदय तोड दे जैसा सदाबहार संगीत देकर अलग ही समां बांध दिया।
कल्याण जी- आनंद जी के सिने कैरियर मे उनकी जोड़ी गीतकार इंदीवर के साथ खूब जमी।छोड दे सारी दुनिया किसी के लिये, चंदन सा बदन और मै तो भूल चली बाबुल का देश जैसे इंदीवर के लिखे न भूलने वाले गीतों को कल्याण जी-आनंद जी ने ही संगीत दिया था।वर्ष 1970 मे विजय आनंद निर्देशित फिल्म जॉनी मेरा नाम में नफरत करने वालो के सीने मे प्यार भर दू, पल भर के लिये कोई मुझे प्यार कर ले जैसे रूमानी संगीत देकर कल्याणजी-आंनद जी ने श्रोताओं का दिल जीत लिया।
मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी फिल्म सच्चा-झूठा के लिये कल्याणजी-आनंद जी ने बेमिसाल संगीत दिया।मेरी प्यारी बहनियां बनेगी दुल्हनियां को आज भी शादी के मौके पर सुना जा सकता है। वर्ष 1989 में प्रदर्शित सुल्तान अहमद की फिल्म दाता में उनके कर्णप्रिय संगीत से सजा यह गीत बाबुल का ये घर बहना एक दिन का ठिकाना है आज भी श्रोताओं की आंखो को नम कर देता है।
वर्ष 1968 मे प्रदर्शित फिल्म सरस्वती चंद्र के लिये कल्याणजी-आनंद जी को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का नेशनल अवार्ड के साथ-साथ फिल्म फेयर पुरस्कार भी दिया गया। इसके अलावा वर्ष 1974 मे प्रदर्शित फिल्म कोरा कागज के लिये भी कल्याणजी-आनंद जी को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का फिल्म फेयर पुरस्कार दिया गया। कल्याणजी ने अपने सिने कैरियर मे लगभग 250 फिल्मों को संगीतबद्ध किया। वर्ष 1992 में संगीत के क्षेत्र मे बहुमूल्य योगदान को देखते हुये वह पदमश्री से सम्मानित किये गये।लगभग चार दशक तक अपने जादुई संगीत से श्रोताओं को भावविभोर करने वाले कल्याण जी 24 अगस्त 2000 को इस दुनिया को अलविदा कह गये।

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